मेरे देश का सबसे गौरवपूर्ण
अंश इसका स्वर्णिम इतिहास और वह “सनातन धर्म “ है जिसने सम्पूर्ण विश्व में मेरे देश
को “विश्व गुरु” का दर्जा दिया |
प्रश्न 1-प्रश्न यह है की सनातन धर्म का सिद्धांत है क्या ?
उत्तर - तो सनातन धर्म का सिद्धांत प्रकृति और जीवों के बीच संतुलन बनाकर ,सम्पूर्ण श्रीष्टि के जन्मदाता “ब्रह्म “को जान कर अपने वास्तविक पहचान को समझ कर ,स्वयं को उन्ही का अंश अथवा स्वरूप जान उनही में विलीन हो जाना है |
प्रश्न 1-प्रश्न यह है की सनातन धर्म का सिद्धांत है क्या ?
उत्तर - तो सनातन धर्म का सिद्धांत प्रकृति और जीवों के बीच संतुलन बनाकर ,सम्पूर्ण श्रीष्टि के जन्मदाता “ब्रह्म “को जान कर अपने वास्तविक पहचान को समझ कर ,स्वयं को उन्ही का अंश अथवा स्वरूप जान उनही में विलीन हो जाना है |
प्रश्न 2-इसने इंसान को क्या स्वरूप
दिया है ?
सनातन धर्म ने इंसान में ही भगवान होने ,और मानव सेवा और न्याय पथ के अनुगमन करते हुए “ब्रह्म” को जानने को ही जीवन का लक्ष्य बताया है | सनातन धर्म ने हर आध्यात्मिक एवं बौद्धिक स्तर के व्यक्ति के लिए “ब्रह्म” को जान सकने का मार्ग दिखाया है |
यह मार्ग हमें “वेदों “ से प्राप्त होता है |वेद आस्तिक के लिए भी मार्ग दिखाते हैं और नास्तिक को भी |
वे मूर्ति पूजक आध्यात्मिक स्तर वालों को भी “ब्रह्म “ के दर्शन कर मार्ग बताते हैं और प्रकृति पूजक /मानव सेवक नास्तिक को भी उसी परम सत्य “ब्रह्म “ तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं |
सनातन धर्म ने इंसान में ही भगवान होने ,और मानव सेवा और न्याय पथ के अनुगमन करते हुए “ब्रह्म” को जानने को ही जीवन का लक्ष्य बताया है | सनातन धर्म ने हर आध्यात्मिक एवं बौद्धिक स्तर के व्यक्ति के लिए “ब्रह्म” को जान सकने का मार्ग दिखाया है |
यह मार्ग हमें “वेदों “ से प्राप्त होता है |वेद आस्तिक के लिए भी मार्ग दिखाते हैं और नास्तिक को भी |
वे मूर्ति पूजक आध्यात्मिक स्तर वालों को भी “ब्रह्म “ के दर्शन कर मार्ग बताते हैं और प्रकृति पूजक /मानव सेवक नास्तिक को भी उसी परम सत्य “ब्रह्म “ तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं |
आज के भारत में सनातन धर्म
विभाजित अवस्थाओं में और अपने समस्त मतों के साथ –हिन्दू धर्म ,बौद्ध
धर्म ,जैन धर्म और सिख धर्म के स्वरूप में मौजूद है और अपनी समस्त बौद्धिक
और आध्यात्मिक मानव स्तर को आत्मसात करने की लचिलता को एकत्रित राष्ट्रियता से प्रदर्शित
कर रहा है |
प्रश्न 3-मैं आज ब्लॉग क्यूँ लिखने आया हूँ ?
प्रश्न 3-मैं आज ब्लॉग क्यूँ लिखने आया हूँ ?
उत्तर- पूर्व काल से भारत के दर्शन
और ज्ञान का केंद्र रहा है |विदेशियों ने हमेशा इसपर अपनी बुरी नज़र रखी और आक्रमण
किए ,पर यह आजतक अपनी मजबूत जड़ों ,मेरे स्वयं के विचार में “सनातन
धर्म “ सत्य है इसी वजह से आज तक के समयावधि में “सनातन “ बना हुआ है |
तभी तो भारत का हर बालक कहते नहीं थकता –“यूनान मिश्र रोमा सब मीट गए जहां से ,अबतक मगर है बाकी नामोनिसा हमारा “|
तभी तो भारत का हर बालक कहते नहीं थकता –“यूनान मिश्र रोमा सब मीट गए जहां से ,अबतक मगर है बाकी नामोनिसा हमारा “|
पर आज कुछ घर के भेदी स्वार्थ
सिद्धि के लिए स्वयं के षड्यंत्र द्वारा तो कभी विदेशी दुश्मनों से जो भारतीय संस्कृति
और धर्म के दुश्मन है ,उनसे मिलकर इसको कमजोर और हमारे लोगों को गुमराह करने
की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं |वे धर्म के विषय में भ्रांतिया फैला हमारे लोगों को
धर्म से दूर कर रहे हैं |
मेरी कोशिश मात्र इतनी है की इस प्रौद्योगिकी के स्तेमाल से जो आज हमारे देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ रही है ,मैं अपने धर्म के विषय में जितना जान पाया हूँ वो उन तक पहुंचा सकु, और जहां संशय हो वहाँ स्वस्थ चर्चा कर सकु |
मेरी कोशिश मात्र इतनी है की इस प्रौद्योगिकी के स्तेमाल से जो आज हमारे देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ रही है ,मैं अपने धर्म के विषय में जितना जान पाया हूँ वो उन तक पहुंचा सकु, और जहां संशय हो वहाँ स्वस्थ चर्चा कर सकु |
धर्म ज्ञान के आदान प्रदान
की ये क्रिया इस धर्म को फैलाएगी इसकी सच्चाई से लोगों को परिचित कराएगी और फैलाई जा रही
भ्रांतियों से लोगों को सजग करने में जरूर कामयाब होगी आज मैं ऐसी कामना करता हूँ |
और हम इसे अगली पीढ़ी और आने वाली कई पीढ़ियों तक सुरक्षित मूल स्वरूप में बिना किसी
बदलाव अपनी इस श्रेष्ठ विरासत को पहुंचा पाएंगे जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी है|
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